Categories
Uncategorized

एक मीठा नज़ारा

कल ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े एक नज़ारा देखा
एक माँ और उसकी गोद में प्यारा सा बच्चा
माँ बच्चे पर चुम्मियों की बौछार करती
उसे पुचकारती, दुलार करती

देखती रही माँ को,
चिलचिलाती धूप में खड़ी
बच्चे को कमर पर पकडे हुए
दूसरे कंधे पर भारी सा बैग
घिसी हुई चप्पल पहने
गले में एक पीला हार, बदन पर कोई सोना नहीं

माँ लगी रही, बच्चे को पुचकारती,
उससे नन्हे शब्दों में बात करती
खिलखिला के हंसती, बच्चे को हसाती

कुछ देर और देखा तो पाया,
बच्चा बहुत नन्हा नहीं था
तकरीबन २-३ साल का होगा
उसका बदन लंबा था और टाँगे सुस्त और कमज़ोर
सिर्फ ऊपर देखता और गर्दन उसकी जैसे अकड़ी हुई
मुंह से लाल टपकती
जिसे माँ अपनी आँचल से, प्यार से पोंछती

समझ गयी के यह एक और क्रूर सच है जीवन का
नम आँखों से फिर देखा माँ और उसके बच्चे को

कई एहसास जो शायद कभी न समझे वो बच्चा
पर हर एहसास महसूस करती वो माँ
अपनी कड़वी सचाइयों में भी
सिर्फ प्रेम और ममता देखती वो माँ
न जाने कितने आंसू पी चुकी होगी
न जाने कितनी मिन्नतें, कितने व्रत कर चुकी होगी
न जाने कितनी रातें जागते काटी होंगी उसने

अचानक से हॉर्न कि आवाज़ से याद आया के बत्ती हरी हो चली है
एक आखरी नज़र देखा माँ-बेटे को

ढूँढा पर, न कोई उदासी, न कोई सन्नाटा दिखा उन दोनों के चेहरे पर
दिखा तो बस एक मीठा सा नज़ारा

एक माँ जो अपनी प्यारे से बच्चे पर
चुम्मियों कि बौछार कर रही थी
और एक बच्चा जो अपनी माँ कि बाहों में
उसके लाड से बेहद खुश था

शायद ज़िन्दगी इतनी भी कड़वी नहीं…

Categories
Uncategorized

छूटी गाड़ियां

चलते चलते इस रास्ते पर

आज मौका मिला

पीछे मुड़ के देखने का

कई गाड़ियां छूटी हैं मुझसे

कुछ तक पहुँच ही नहीं पायी

और कुछ को जान-बूझ कर छोड़ दिया

न जाने क्यों सब कहते हैं छूटी गाड़ियों को जाने दो

वो देखो तो ज़रा ….

उस गाडी की पिछली सीट पर मेरे कुछ ख्वाब बसे हैं

और वहीं कहीं खुली खिड़की से बाहर झांकती मैं कुछ गुनगुना रही हूँ

उस गाडी पर मैं डरी हुई, कुछ नए दोस्त बनाती, हँसते- हंसाते

नए शहर नए लोगों से मिलते, नयी भाषा बोलती, नए नज़ारे देखती …

ठंडी साँसे भर,

अब कभी पीछे नहीं देखती

दिल में एक अजीब सी खलिश होती है

गाडी छूट जाना तो अब आदत बन चली है

ख्वाबों को लगाम देना तो अब आदत बन चली है

Categories
Uncategorized

पुराने दोस्त

कल अलमारी साफ़ करने की फुर्सत मिली
साथ में अपने आप से मुलाक़ात की भी

अरसे बाद वह पुरानी कमीज मिली
जिसे पहन कर लगता था, ये बस मेरी है
मेरे जैसी इसके पास और कोई नहीं

वो दुपट्टा जो हर रंग में रंग जाता
जैसे उसका होना सबमें होना ही था

वो अंगूठी जिसे घंटो उंगली में घूमाती मैं
दिन भर गुनगुनाती रहती, मुस्कुराती रहती

कुछ पुराने रंग उभर के निकले
साथ ही उमड़ आया मेरे अंदर का मैं

अच्छा लगता है यहां
इन पुराने दोस्तों के बीच

Categories
Uncategorized

मांगे भी… जो ना मिले

कल एक पुराने दोस्त से कुछ मांग डाला
सोचा नहीं, बस कह डाला

बदले में उसने अपनी पसंद ना-पसंद पर
एक टिपण्णी दे डाली

कुछ पल लगे समझने में
आजकल दोस्तों से माँगना भी
फ़िल्टर लगा के करना पड़ता है

वहीं एक लम्बे सफर की मौत हुई
वहीं उसे दफना कर मैं फिर चल दी

अब शायद कभी ना मांग सकूंगी

Categories
Uncategorized

क्षणिक सम्भवता

वो कल जो ऐसा होता तो …
वो कल जो ऐसा ही होगा
इस छोर से छोर
उस छोर से इस छोर
कौन कम्भख्त जीता है आज में !

Categories
Uncategorized

कब लौटूंगी ?

गेट से निकलते देखा उसे, कथै रंग बालों में, सुनहरा चेहरा,

चमकते चमड़े का लैपटॉप बैग, हील वाली सेंडल, मेहेंगा सूट

सब कुछ तो था इसके पास

तभी बस का हॉर्न बजा,

नाइटी पर दुपट्टा ओढ़े, बाल बिखरे, अपने दो बच्चों का स्कूल बैग उठाये,

माँ ने जल्दी से बच्चों को बस में चढ़ाया, फिर वो चली, घर वापिस

धीमे कदम, ठंडी हवा जैसे उसके मन की बातें सुन रही थी

क्या कोई लम्हा है मेरा ? बस मेरा अपना ?

कब लौटूंगी इस दौड़ से मैं ?

शाम हुई, और फिर रात होने को आयी

थकी हुई, लौटी वो, लैपटॉप बैग और साथ में चार फाइलें भी

घर पहुंची, देखा, बच्चे सो चुके थे

टेबल पर खाना लगा था, साथ खाने वाला कोई न था

अकेले बैठे, मोबाइल स्क्रीन को देखती नम आँखें,

खिड़की से बाहर नज़र गयी, देखा, बच्चों को कहानी सुनाती एक और माँ

……सब कुछ तो है इसके पास…..

…. कब लौटूंगी इस दौड़ से मैं !

Categories
Uncategorized

एक अटपटा शख्स

बिखरे बाल, मैली कमीज, पुरानी चप्पल,
अजीब सा बैग लिए हुए, माथे पे लम्बा टीका
कड़ी धूप में पका हुआ चेहरा …
बड़ा अटपटा सा इंसान था
ऐसे कॉफ़ी शॉप में बिन बुलाया मेहमान हो जैसे…

फिर अचानक, कुछ तो हुआ
किसी बात पर ठहाके मारके हंस पड़ा वो

इस बार नज़दीक से देखा,उसकी आँखें खिल के हंस रही थीं
ना कुछ छिपा था उनमें, न कोई संदेह
बस, उस लम्हे में डूबा था, सबसे अनजान

मैंने फिर देखा उसकी ओर,
इस बार उसके अटपटेपन में एक सुकून दिखा
एक मुक्त आत्मा, जो बस अपने में हे मग्न थी,
बेपरवाह, मस्त मौला …

शायद हम सब का नज़रिया ही अटपटा हो चला है..

Categories
Uncategorized

कहाँ रहती हूँ मैं …

फिर वही चहल पहल, फिर वही शोर,
लौट आयी थी वो, फिर अपने शहर
एक पल के लिए लगा, यहीं तो मेरा घर है
यहीं मेरी बोली, यहीं मेरी हंसी…
यहीं मेरी यादें, यहीं मेरा बचपन
यहीं तो मैं रहती हूँ, हमेशा से…

फिर आया समय लौट जाने का,
सन्नाटों में डूब जाने का
नये रिश्तों में खुद को ढूंढ़ने का
नये अल्फ़ाज़ों के समंदर में गोते लगाने का

कभी कभी सोचती हूँ ,
आखिर लौटना क्या है ?
उस शोर में खुद को पाना ? या सन्नाटों में खो जाना ?

Categories
Uncategorized

Musings

वही सब कुछ, पहले जैसा,
फिर भी कुछ फर्क महसूस होता है…

पुरानी यादों में कुछ नयी तसवीरें
पुराने दोस्तों में कुछ नए रिश्ते
पुराने अफसानों में नयी बारीकियां

कुछ नया है, पुराने में भी
कुछ पुराना, नए में भी…

Nothing changes… It is all, always the same… Or is it? The Same Anew?

Thanks for being here.

thesameanew.com